Jharkhand हाई कोर्ट में लोकायुक्त सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि लंबे समय से खाली पड़े इन पदों पर नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इस मामले पर 25 मार्च को बैठक होगी और उसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की है। यह मामला राज्य में संवैधानिक संस्थाओं की सुचारू कार्यप्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संवैधानिक पदों पर नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा विधानसभा में भी उठा
इतने वर्षों से महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्ति नहीं होने के कारण यह विषय विधानसभा में भी उठ चुका है। जमशेदपुर में आरटीआई एक्टिविस्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इन पदों पर नियुक्ति जल्द नहीं की गई तो संगठन सशक्त आंदोलन करेगा। संवैधानिक पदों में मुख्य सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्त, लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग शामिल हैं। इनके खाली रहने से न केवल प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरटीआई संघ ने 14 अप्रैल तक नियुक्ति न होने पर संसद घेराव की दी चेतावनी
आरटीआई कार्यकर्ता संघ की केंद्रीय समिति की बैठक जमशेदपुर में केंद्रीय अध्यक्ष दिल बहादुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि 14 अप्रैल तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं की जाती है तो संगठन संसद भवन, नई दिल्ली के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेगा। साथ ही राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। संघ ने यह भी कहा कि सरकार ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की है। बैठक में कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का भी निर्णय लिया गया।
संगठन ने संवैधानिक पदों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर जोर दिया
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सदन कुमार ठाकुर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी जो संवैधानिक पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की निगरानी करेगी। इसके अलावा 5 अप्रैल को मिलन समारोह आयोजित करने और 31 मई तक पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और चाईबासा जिला समितियों के पुनर्गठन का निर्णय भी लिया गया। संघ ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर नियुक्ति न होने और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आंदोलन जारी रहेगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
