Jharkhand हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रांची नगर निगम के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन भुगतान के लिए चार सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो नगर विकास सचिव और निगम आयुक्त को अदालत में हाजिर होना होगा। अवध बिहारी तिवारी और अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर कर निगम की लापरवाही को उजागर किया है।
पेंशन भुगतान में विलंब, कोर्ट ने पहले भी दिए थे निर्देश
हाई कोर्ट ने वर्ष 2012 में प्रार्थियों को उनके सेवानिवृत्ति की तिथि से पेंशन का भुगतान करने का आदेश दिया था। हालांकि नगर निगम ने इसके विपरीत वर्ष 2017 से पेंशन भुगतान करने का निर्णय लिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रार्थियों ने वर्ष 2018 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने पुनः स्पष्ट किया कि पेंशन का भुगतान सेवानिवृत्ति की तिथि से ही होना चाहिए, लेकिन निगम अब तक इस आदेश का पालन नहीं कर सका है।
अवमानना याचिका और कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया
सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने निगम की लापरवाही के कारण अवमानना याचिका दाखिल की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का सख्त निर्देश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि अगर समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे। अदालत का यह रुख नगर निगम को चेतावनी स्वरूप है और स्पष्ट करता है कि न्यायालय से छेड़छाड़ या विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे की सुनवाई और उम्मीदें
अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई एक मई को निर्धारित की है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने एरियर पेंशन की प्रतीक्षा है और कोर्ट का आदेश इस दिशा में राहत की उम्मीद जगाता है। नागरिकों और कर्मचारियों की नजर अब निगम और कोर्ट के बीच अगले कदम पर लगी है। यदि निगम आदेश का पालन करता है, तो कर्मियों को लंबित पेंशन मिल सकेगी और न्याय सुनिश्चित होगा।
