Jharkhand News: झारखंड का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र देवघर अब और विकसित होने जा रहा है। शहर में बढ़ती आवाजाही और वाहनों के भारी दबाव को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने देवघर बाईपास परियोजना की शुरुआत कर दी है। यह बाईपास कुल 49 किलोमीटर लंबा होगा और देवघर एयरपोर्ट के पास कर्णकोल से शुरू होकर शहर के बाहर होते हुए हिंडोलावरण में समाप्त होगा। परियोजना की कुल लागत 1556 करोड़ रुपये है और इसे 2028 के मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बाईपास से शहर की जाम की समस्या होगी दूर
देवघर में सड़क मार्ग का जाल लगातार बढ़ रहा है और शहर तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है। बढ़ते वाहनों के दबाव से जाम की स्थिति आम बात हो गई थी। इस बाईपास के बन जाने से भारी वाहन शहर में प्रवेश नहीं करेंगे और यात्री बसें भी शहर से होकर नहीं गुजरेंगी। उदाहरण के लिए, अगर कोई वाहन भागलपुर से रांची या रांची से पूर्णिया जा रहा है, तो उसे अब शहर में प्रवेश नहीं करना होगा। यह बाईपास यात्रियों और वाहन चालकों का समय और ईंधन दोनों बचाएगा और शहरवासियों को शांति प्रदान करेगा।
बाईपास का डिजाइन और मार्ग विवरण
देवघर बाईपास का मार्ग देवघर-बासुकीनाथ फोरलेन के क्लोजर से शुरू होता है। कर्णकोल से निकलकर यह शहर के बाहर घूमते हुए मोहनपुर प्रखंड में चोपामोड़-हंसडीहा एनएच को क्रॉस करेगा और हिंडोलावरण में स्थित चौराहा पर समाप्त होगा। हिंडोलावरण में एक विशेष चौराहा डिज़ाइन किया गया है, जहां से शहर में प्रवेश करना चाहने वाले वाहन सर्विस रोड के माध्यम से शहर में पहुंचेंगे। इस परियोजना के साथ ही शहरवासियों और यात्रियों दोनों के लिए यात्रा और आवाजाही आसान और सुविधाजनक हो जाएगी।
सांसद और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय पहल
देवघर बाईपास परियोजना को सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के प्रयासों से मंजूरी मिली है। उन्होंने न केवल इस बाईपास को संभव बनाया, बल्कि हंसडीहा-महगामा फोरलेन और देवघर-बासुकीनाथ फोरलेन जैसी अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को भी गति दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में गोड्डा संसदीय क्षेत्र का विकास लगातार बढ़ रहा है और देवघर बाईपास इस विकास की महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा है। यह परियोजना न केवल शहर को आधुनिक बनाएगी बल्कि यात्रियों और व्यवसायियों के लिए भी नए अवसर उत्पन्न करेगी।
