Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची में नगर निगम चुनावों के परिणामों के बाद शहर की राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है। महापौर पद के निर्णय के बाद उप महापौर पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज हो गई हैं। नए निर्वाचित पार्षद अपने बीच उप महापौर का चुनाव करेंगे। घोषित पार्षद परिणामों में भाजपा, कांग्रेस और जेएमएम समर्थित उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई है, जिससे हर पार्टी का उप महापौर पद पर दावा मजबूत बन गया है।
उप महापौर पद के लिए बहुमत की जरूरत
उप महापौर बनने के लिए 53 वार्डों में से कम से कम 27 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। परिणामों के बाद तीनों पार्टियों के भीतर इस संख्या तक पहुँचने के प्रयास शुरू हो गए हैं। ऐसे नेता जो तीन या उससे अधिक बार पार्षद रह चुके हैं और इस बार जीत भी हासिल की है, उन्हें उप महापौर पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। चूंकि महापौर का पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, इसलिए उप महापौर पद के लिए गैर-जनजातीय चेहरे के चुनाव की संभावना भी बढ़ गई है।
कांग्रेस और जेएमएम की रणनीति
कांग्रेस और जेएमएम समर्थित पार्षदों ने भी अपनी बैठकें शुरू कर दी हैं। हालाँकि संख्या के लिहाज से वे पीछे माने जा रहे हैं, लेकिन उप महापौर चुनाव में क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक समर्थन पर चर्चा जारी है। यदि विपक्ष एकजुट होता है, तो जेएमएम का उप महापौर पद के लिए दावा करना भी संभव माना जा रहा है। जेएमएम समर्थित ईहतशाम (वार्ड 21), मोहम्मद असलम (वार्ड 22) और पहली बार पार्षद बनी आरती कुमारी (वार्ड 46) उप महापौर पद के लिए दावेदार हैं।
भाजपा के दावेदार और मुकाबले की स्थिति
भाजपा समर्थित पार्षदों में सुनील यादव (मामा) वार्ड 20 से हैट्रिक जीत हासिल कर चुके हैं। इसके अलावा, वार्ड 1 से नकुल तिर्की, वार्ड 26 से प्रदीप कुमार और वार्ड 44 से पार्षद परमजीत सिंह भी उप महापौर पद की दौड़ में शामिल हैं। वहीं कांग्रेस के लिए जमीला खातून (वार्ड 49), आशा गुप्ता (वार्ड 18) और मोहम्मद सालाउद्दीन (वार्ड 17) भी दावेदार हैं। इन सभी दावेदारों के बीच बहुमत पाने की सियासी जंग तेजी से चल रही है और आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
