Jharkhand में मनुष्य और हाथियों के बीच टकराव एक गंभीर समस्या बन चुका है। पिछले एक महीने में ही हाथियों के हमलों में तीस से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी बीच सोमवार देर शाम धनबाद डिवीजन, ईस्ट सेंट्रल रेलवे में एक अनोखा वाकया देखने को मिला। यहां हाथियों का एक झुंड रेल पटरी पर ही कैंप करने लगा। इस घटना से रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों ने देखा कि हाथियों का झुंड पटरी पर खड़ा था और किसी भी समय ट्रेन के गुजरने से बड़ा हादसा हो सकता था।
ट्रेन संचालन ठप, यात्रियों में डर का माहौल
हाथियों के रेल पटरी पर होने के कारण धनबाद से डाल्टनगंज मार्ग की सभी ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं। महुआमीलान और निद्रा के बीच डाउन लाइन पर हाथियों की आवाजाही ने ट्रेनों के संचालन को लंबी अवधि के लिए रोक दिया। रेलवे प्रशासन के निर्देशों के बाद, ट्रेनों के मार्गों को तत्काल बदल दिया गया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन परिचालन को सुरक्षित बनाने के लिए यात्रियों को नई रूट की जानकारी तुरंत दी गई और गाइडलाइन जारी की गई। इस घटना से यात्रियों और स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर भारी चिंता देखने को मिली।
ट्रेन मार्गों में बदलाव और रूटिंग
इस दौरान 13025 हावड़ा भोपाल एक्सप्रेस, जो धनबाद के माध्यम से जाने वाली थी, को प्रारंभ में बरकाकाना स्टेशन पर रोक दिया गया। इसके बाद इसे बरकाकाना से हजारीबाग टाउन, कोडरमा और गया होते हुए आगे भेजा गया। इसी तरह अन्य कई ट्रेनें भी नए मार्ग से चल रही हैं। प्रभावित ट्रेनों में शामिल हैं – 11448 हावड़ा जबलपुर शक्तिपुंज एक्सप्रेस, 12877 रांची न्यू दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस, 13347 बरकाकाना पटना पलामू एक्सप्रेस, 18635 रांची सासाराम एक्सप्रेस, 18611 रांची वाराणसी एक्सप्रेस, 18309 सांबलपुर जम्मू तवी एक्सप्रेस, 18524 वाराणसी विशाखापत्तनम एक्सप्रेस और 21894 पटना टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस। साथ ही 13348 पटना बरकाकाना पलामू एक्सप्रेस भी गया, कोडरमा, हजारीबाग टाउन और बरकाकाना होते हुए चल रही है।
रेलवे प्रशासन की तैयारियां और यात्रियों के लिए निर्देश
रेलवे प्रशासन ने सभी प्रभावित मार्गों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है और हाथियों के व्यवहार पर नजर रखी जा रही है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रेनों की स्थिति और समय सारणी की पुष्टि करें। अधिकारियों ने बताया कि हाथियों की यह आवाजाही जंगल और आसपास के क्षेत्र से संबंधित है और प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है कि न तो हाथियों को कोई नुकसान पहुंचे और न ही यात्रियों को खतरा हो। रेलवे का कहना है कि इस प्रकार की अप्रत्याशित घटनाओं के लिए अलर्ट सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है।

