Jharkhand के दुमका जिले के लताबनी गांव में आज भी रेलवे की रफ्तार दूर की कौड़ी है। यहां के कई बुजुर्ग और बच्चे कभी ट्रेन की छुक-छुक की आवाज तक सुनने से वंचित हैं। लेकिन गांव के एक युवक सोमराज मरांडी ने इस कमी को अपनी कला के जरिए पूरा कर दिया। उसने अपने घर को पूरी तरह से रेलगाड़ी का रूप देकर एक अनोखी छवि पेश की है। दूर से यह मकान किसी असली एक्सप्रेस ट्रेन जैसा दिखता है। ईंट-पत्थर के इस घर को देखने के लिए आसपास के इलाके से लोग आ रहे हैं और यह घर झारखंड से बंगाल तक चर्चा का विषय बन चुका है।
समस्या से जन्मी अनोखी रचनात्मकता
सोमराज मरांडी का कहना है कि गांव के लोग रेलवे की सुविधा से वंचित हैं और उन्होंने सोचा क्यों न घर को रेलगाड़ी जैसा बना दिया जाए, ताकि बच्चों और बुजुर्गों को रेल की अनुभूति मिल सके। उन्होंने अपने मकान की खिड़कियां और दीवारों पर ट्रेन की तरह डिजाइन बनाकर इसे ‘नीला कोच’ जैसा रूप दिया है। सोमराज कहते हैं, “रेल बुला रही है, सिटी बजा रही है,” जो उनकी कल्पना की झलक है। आदिवासी ग्रामीणों की आर्थिक विवशता के बावजूद उन्होंने इस कला के माध्यम से अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया है। यह घर केवल कलाकारी नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की आशा और आकांक्षा का प्रतीक भी बन गया है।
गांव वालों और आसपास के लोगों की खुशी
इस घर की रचना देखकर गांव के बुजुर्ग और बच्चे बेहद खुश हैं। जिन्हें कभी रेलवे की ट्रेन नहीं दिखी, वे अब अपने आंगन में रेलगाड़ी का नजारा देख पा रहे हैं। सोमराज की पत्नी अनादी मुर्मू बताती हैं कि दूर-दूर से लोग इसे देखने आते हैं और उन्हें गर्व होता है। गांव के लोगों में भी इस कला की सराहना हो रही है। उनके चाचा भी इस काम से प्रसन्न हैं और मानते हैं कि यह रचना झारखंड व बंगाल के ग्रामीण इलाकों में रेलवे सुविधा की कमी को उजागर करती है। इस कलाकारी ने न सिर्फ लोगों को प्रेरित किया है बल्कि सरकार को भी सोचने पर मजबूर किया है।
बंगाल तक पहुंची ग्रामीण कलाकार की शोहरत और उम्मीद
सोमराज का यह अनूठा घर अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी चर्चा बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भी हो रही है। लोग यहां सेल्फी लेने और इस कला की तारीफ करने आते हैं। शिकारीपाड़ा के विधायक आलोक सोरेन ने इस कलाकार की तारीफ की, लेकिन केंद्र सरकार पर रेल कनेक्टिविटी की कमी को लेकर निशाना भी साधा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सांसद नलिन सोरेन की पहल से जल्द इस क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस तरह, एक कलाकार की कल्पना ने गांव के विकास की विसंगति को उजागर किया है और अपनी कला से लोगों में उम्मीद की किरण जगा दी है।

