Jharkhand, जो कि खनिज संपदा से भरपूर राज्य है, के केंद्र सरकार द्वारा नजरअंदाज किए जाने पर राजनीतिक नेता खूब आलोचना कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच मंगो नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। खास बात यह है कि इस बार सत्ता की लड़ाई खुद एनडीए गठबंधन के अंदरूनी माहौल में देखने को मिल रही है। जनता दल (यूनाइटेड) ने भाजपा से अनुरोध किया है कि वह मंगो मेयर पद से पीछे हट जाए, लेकिन यह मांग ज्यादा चुनावी नहीं बल्कि संगठनात्मक सौजन्य के रूप में रखी गई है। गठबंधन की शिष्टाचार की सीमाओं को पार करते हुए, जेडीयू के नेता सीधे जामशेदपुर वेस्ट के विधायक सरयू रॉय के पास पहुंचे और मेयर पद के लिए उन्हें एनडीए का उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद जताई।
जेडीयू का दबाव और भाजपा की चुप्पी
जेडीयू के नेताओं ने सरयू रॉय से मुलाकात कर स्पष्ट किया कि एनडीए का उम्मीदवार वह होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि उनके पास इस पद के लिए कई योग्य उम्मीदवार हैं। बैठक में यह भी जोर दिया गया कि उम्मीदवार की संगठनात्मक मजबूती, सामाजिक आधार और जनता का समर्थन होना जरूरी है। इस बीच भाजपा का रुख अस्पष्ट ही बना हुआ है। जुगसलाई और मंगो सीट को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति अभी तक सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने नीरज सिंह की पत्नी संध्या सिंह को मैदान में उतारने की इच्छा जताई है। भाजपा इस पावर स्ट्रगल में पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिससे इस चुनावी जंग का मिजाज और भी पेचीदा हो गया है।
स्वतंत्र प्रत्याशी विकास सिंह का विरोध
इसी बीच, पिछले विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे विकास सिंह ने जेडीयू के बयान को “शाम की विलाप” करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर जेडीयू पर आरोप लगाया कि वह उन कार्यकर्ताओं को गुमराह कर रही है जो जेडीयू के समर्थन से मेयर चुनाव लड़ने के सपने देख रहे थे। विकास सिंह ने आक्रोश में कहा कि वे हरसंभव प्रयास करेंगे कि जेडीयू समर्थित उम्मीदवार को हराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह चुनाव पार्टी लाइन पर नहीं हो रहा है, इसलिए वे जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने समर्थकों के बलबूते जीत हासिल करेंगे। यह बयान राजनीतिक माहौल को और भी गर्मा देता दिख रहा है।
सरयू रॉय की भूमिका और अन्य राजनीतिक चालें
विधायक सरयू रॉय ने जेडीयू के नेताओं को आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर फिर से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से बातचीत करेंगे। इस सबके बीच पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता भी अपनी पत्नी सुधा गुप्ता के लिए सूक्ष्म रणनीति बना रहे हैं। यह सत्ता संघर्ष ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य के नेता केंद्रीय बजट में खनिज संपदा वाले राज्य की उपेक्षा को लेकर नाराज हैं और मध्यम वर्ग महंगाई के बोझ तले दबा हुआ है। इस राजनीतिक लड़ाई में हर खिलाड़ी अपनी चाल चलने को बेकरार है, जो मंगो मेयर पद के लिए जंग को किसी ड्रामाटिक टीवी सीरीज की तरह रोचक बना रही है।

