Jharkhand News: अगर आप ताजा और स्थानीय स्रोत से आई मछली पसंद करते हैं तो बरही चौक का मछली बाजार आपके लिए एक उपयुक्त जगह है। यह बाजार स्थानीय और ताजी मछलियों की बिक्री के कारण क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। तीन राष्ट्रीय राजमार्गों के संगम स्थल पर स्थित यह मछली बाजार अब ताजी मछलियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, यात्री और दूर-दूर से आए ग्राहक ताजी मछलियों की खरीदारी करते हैं। मुख्य रूप से तिलैया डैम और आसपास के कई स्थानीय जलाशयों से मछलियां यहां आती हैं। रोहु, मृगल, कवाई, पहाड़ी, झींगा और कतला मछली यहां सबसे लोकप्रिय प्रजातियां हैं।
बरही मछली बाजार में मछलियां तिलैया जलाशय के अलावा मधोपुर, बेंदगी, कोयली, धामना, पोदइया, जवाहर डैम समेत लगभग 150 छोटे-बड़े जलाशयों से आती हैं। इन मछलियों की ताजगी और गुणवत्ता के कारण ग्राहक इनपर भरोसा करते हैं और उनकी मांग निरंतर बनी रहती है। आसपास के अंजनवा, महेशा और लोटवा डैम से भी मछलियां आती हैं। यहां तक कि आंध्र प्रदेश से भी मछलियां बाजार में आती हैं, लेकिन स्थानीय और ताजी मछलियां कीमतों के बावजूद ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। दैनिक लगभग 6 क्विंटल मछलियों की खपत से इस क्षेत्र की मछली पालन और व्यापार को मजबूती मिली है जिससे मछुआरे और व्यापारी आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। राज्य सरकार और मत्स्य विभाग समय-समय पर नाव, फ्रीजर, गाड़ियां, आवास और सब्सिडी पर ऋण जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।
तिलैया जलाशय में पिंजरा प्रणाली द्वारा मछली पालन किया जा रहा है जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। बरही के कई मछुआरों को उनके कार्य के लिए पुरस्कार भी मिल चुके हैं। बर्सोट गांव के देवानंद कुमार को राज्य स्तरीय सम्मान मिला है। प्रशिक्षण के बाद मछली के बच्चे और चारा मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे मछुआरों को मदद मिलती है। हालांकि, ठंडा भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण व्यापारियों को कभी-कभी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद मछुआरों की मेहनत से बरही मछली बाजार लगातार प्रगति कर रहा है। लोग कहते हैं कि मछली बाजार सड़क किनारे स्थित है और इसे व्यवस्थित करने की जरूरत है ताकि इसकी पहचान और मजबूती बढ़े।
बरही में तीनों राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे कई होटल और रेस्तरां हैं जहां स्थानीय ताजी मछली के व्यंजन परोसे जाते हैं। बरही चौक के आसपास कई स्टालों पर ताजी मछली फ्राई और अन्य व्यंजन उपलब्ध हैं। यहां ताजी मछली की मांग लगातार बढ़ रही है। कई होटल ‘झींगा होटल’ के नाम से भी चलते हैं जहां बड़ी मात्रा में ताजा झींगा बिकता है। मछली विक्रेता बताते हैं कि स्थानीय मछली की मांग दिन-ब-दिन बढ़ रही है और इससे उनके परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने हैं। जवाहर डैम से 25 से 30 किलो वजन वाली बड़ी मछलियां भी बाजार आती हैं। ग्राहक ताजी मछलियों पर भरोसा करते हैं और दूर-दूर से आकर खरीदारी करते हैं। सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का मछुआरों को अच्छा लाभ मिला है जिससे उनकी आमदनी पहले से बेहतर हुई है। होटल और रेस्तरां से भी बड़ी मछलियों के नियमित ऑर्डर मिल रहे हैं।

