Jharkhand News: ओडिशा मेडिकल सर्विसेज़ एसोसिएशन (OMSA) ने राज्य सरकार की कथित अनदेखी और लंबे समय से लंबित मांगों के विरोध में 26 दिसंबर 2025 से राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस आंदोलन में सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) से जुड़े सैकड़ों डॉक्टर शामिल हो चुके हैं। OMSA का कहना है कि राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी होने के बावजूद सरकार न तो नए डॉक्टरों की पर्याप्त भर्ती कर रही है और न ही लंबे समय से कार्यरत डॉक्टरों का नियमितीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा कार्यस्थलों पर सुरक्षा की कमी, डॉक्टरों पर हमले, अत्यधिक कार्यभार और अपर्याप्त भत्तों को लेकर भी डॉक्टरों में गहरा असंतोष है।
जब सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर जाते हैं, तो आमतौर पर सवाल उठता है कि क्या यह कदम मरीजों के खिलाफ है। OMSA इस सवाल का साफ जवाब देता है—यह हड़ताल मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि एक उपेक्षित और चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक दिन या एक मांग का नतीजा नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्याओं का परिणाम है। राज्य के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर हालात ऐसे हैं कि एक ही डॉक्टर को सैकड़ों मरीजों का इलाज करना पड़ता है। इससे न केवल डॉक्टरों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है, बल्कि इलाज की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। OMSA के अनुसार, जब व्यवस्था ही कमजोर हो, तो उसका खामियाजा अंततः मरीजों को ही भुगतना पड़ता है।
डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार और समाज ने उन्हें “कोरोना योद्धा” कहकर सम्मान दिया, लेकिन आज वही सरकार उनकी सुरक्षा, सेवा शर्तों और सम्मान के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है। अस्पतालों में डॉक्टरों पर हमले, गाली-गलौज, अपमान और अनावश्यक प्रशासनिक दबाव अब आम बात हो गई है। OMSA का कहना है कि डॉक्टर हड़ताल पर जाना नहीं चाहते, क्योंकि वे जानते हैं कि इससे आम लोगों को परेशानी होती है। लेकिन जब बार-बार संवाद और ज्ञापन देने के बावजूद सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो सड़क पर उतरना मजबूरी बन जाता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आज उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक कमजोर हो जाएगी।
OMSA नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल मरीजों के नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही के खिलाफ है। संगठन के अनुसार, वे लंबे समय से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार टालमटोल कर रही है। डॉक्टरों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित किए बिना अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देना असंभव है। एहतियात के तौर पर OMSA ने घोषणा की है कि 26 दिसंबर से रोज़ाना सुबह 10 बजे से 11 बजे तक OPD सेवाएं स्थगित रहेंगी। हालांकि, संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं, इमरजेंसी विभाग, मातृ एवं शिशु सेवाएं और अन्य आवश्यक सेवाएं पूरी तरह जारी रहेंगी। OMSA का कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी की जाती हैं, तो इसका सबसे बड़ा लाभ मरीजों और आम जनता को ही मिलेगा।
