Jharkhand News: कांग्रेस की पार्लियामेंट्री पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अरावली पर्वत श्रृंखला के लिए ‘मौत की सजा’ जारी कर दी है। सोनिया गांधी ने बताया कि सरकार ने अरावली की उन जगहों पर जहां ऊंचाई 100 मीटर से कम है, वहां खनन को पूरी तरह से मुक्त कर दिया है। इस फैसले को उन्होंने पर्यावरण के प्रति उदासीनता और अवैध खनन को बढ़ावा देने वाला बताया।
अरावली पर्वत की महत्वता और खनन पर पाबंदी
सोनिया गांधी ने अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में लिखा कि अरावली की श्रृंखला गुजरात से राजस्थान और हरियाणा तक फैली हुई है और भारतीय भूगोल व इतिहास में इसकी अहम भूमिका रही है। लेकिन मोदी सरकार की हालिया नीति ने इन पहाड़ों को भारी नुकसान पहुंचाने वाली अवैध खनन की आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह फैसला सुनाकर उन सभी खनन माफियाओं के लिए दरवाजे खोल दिए हैं जो अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को, जो 100 मीटर से कम ऊंचाई वाला है, तबाह करना चाहते हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कमजोर पड़ती भूमिका
सोनिया गांधी ने सरकार की पर्यावरण नीतियों में गंभीर और निरंतर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को भी राजनीतिक दबाव के कारण कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एनजीटी को उसकी पूरी स्वायत्तता और स्वतंत्रता लौटानी चाहिए ताकि वह सरकार के प्रभाव और नीति के दबाव से बाहर होकर न्यायिक फैसले दे सके। उनका कहना था कि पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका अहम है और इसे कमजोर करना देश के हित में नहीं है।
पर्यावरण के प्रति सहयोगात्मक और समन्वित प्रयास की जरूरत
सोनिया गांधी ने पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर अंतर-सरकारी समन्वय की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने खासतौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को एक क्षेत्रीय और पूरी सरकार के स्तर पर समेकित दृष्टिकोण से ही हल किया जा सकता है। साथ ही भूजल में यूरेनियम प्रदूषण जैसी समस्याओं को भी केवल मिलकर काम करने से ही दूर किया जा सकता है। सोनिया ने मोदी सरकार से पर्यावरण मामलों में सहयोगात्मक संघवाद की भावना दिखाने की अपील की।
पर्यावरण संरक्षण में कानून का पालन और स्थानीय समुदायों का सम्मान आवश्यक
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की पर्यावरण नीतियों को कानून के शासन, स्थानीय समुदायों के सहयोग और पर्यावरण तथा मानव विकास के बीच अटूट संबंध की समझ के आधार पर चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तभी हम एक स्वस्थ और सुरक्षित भारत का निर्माण कर पाएंगे। उनका मानना है कि केवल इस तरह के दृष्टिकोण से ही पर्यावरण संरक्षण और विकास को संतुलित किया जा सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण सुनिश्चित हो सकेगा।

