अशोक शुभदर्शी की कविताओं में फैशन के रैम्प पर छिपे समाज के अंतर्विरोध, स्त्री के संघर्ष और अधिकारों पर गहन चर्चा. बाजार की निगाह से परे देखने की पुकार. The post रैम्प पर चलती स्त्री को दुनिया किस नजर से देखती है ? अशोक शुभदर्शी की कविताओं ने उठाये समाज से तीखे सवाल appeared first on Prabhat Khabar.