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TribalJharkhand News Desk

आदिवासी संस्कृति और परंपरा को बचाना हम सभी का कर्तव्य: भूषण बाड़ा

आदिवासी संस्कृति और परंपरा को बचाना हम सभी का कर्तव्य: भूषण बाड़ा

 कुरडेग मिशन में सांस्कृतिक नाच-गान प्रतियोगिता आयोजित, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली मंडलियां को विधायक ने किया पुरस्कृत

सिमडेगा। 

विधायक सह कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूषण बाड़ा ने कुरडेग मिशन में आयोजित आदिवासी सांस्कृतिक नाच-गान प्रतियोगिता में कहा कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोककला को जीवित रखने के लिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है। पारंपरिक नाच-गान जैसे आयोजन ही हमारी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल विधायक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली नृत्य और गायन मंडलियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। विधायक भूषण बाड़ा ने कहा कि झारखंड की पहचान यहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से है। हमारी सांस्कृतिक विरासत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज के इतिहास, पहचान और परंपराओं की धरोहर है। इसे बचाना हम सभी का कर्तव्य है। ऐसे आयोजनों के दम पर ही पारंपरिक कला और संस्कृति को जीवित रखा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, परंपरा, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य को अपनाने तथा इनके संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना जरूरी है। गांवों में होने वाले पारंपरिक आयोजन लोगों को जोड़ने के साथ सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। इसलिए ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके। विधायक ने जिले में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि धुमकुड़िया भवन में बड़े पैमाने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही जिला स्तरीय अखाड़ा का भी आयोजन किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना है। मौके पर प्रखंड अध्यक्ष तुलसी प्रांगत खलखो, पाकरटांड़ प्रखंड अध्यक्ष अजित लकड़ा, उप प्रमुख सिल्बेस्टर बघवार, सुजीत तिर्की, वॉटर टोप्पो मुखिया उर्मिला कुजूर सहित अन्य उपस्थित थे।

इन मंडलियों ने जीता खिताब

प्रतियोगिता में संत अन्ना की टीम को प्रथम, सर्पमुण्डा को दूसरा, महुआटोली को तीसरा, गंभैर दीपा को चौथा, खड़वाटोली को पाँचवा, झुनका छापर को छठवा स्थान प्राप्त किया। इन सभी मंडली को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार मिलने पर सभी मंडलियों के चेहरे खिल उठे।

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