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DhanbadHealthJharkhand News Desk

सदर अस्पताल धनबाद में ब्रेन हेमरेज से पीड़ित बुजुर्ग मरीज को मिला नया जीवन; लाखों के खर्च से बचा परिवार

सदर अस्पताल धनबाद में ब्रेन हेमरेज से पीड़ित बुजुर्ग मरीज को मिला नया जीवन; लाखों के खर्च से बचा परिवार

धनबाद:  उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री आदित्य रंजन के मार्गदर्शन में सदर अस्पताल, धनबाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया है कि बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन और समर्पण से सरकारी अस्पतालों में भी गंभीर बीमारियों का सफल इलाज संभव है। बिहार के बांका (भतकुंडी) निवासी एक बुजुर्ग मरीज, जो ब्रेन हेमरेज व स्ट्रोक (लकवा) की गंभीर स्थिति में पहुंचे थे, उन्हें सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक स्वस्थ कर डिस्चार्ज कर दिया है।

मरीज अचानक गंभीर रूप से अचेत हो गए थे और उन्हें लकवा मार गया था। परिजन जब उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे तो मरीज की स्थिति बेहद नाजुक थी; वे बेसुध थे और सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। जिससे वेंटिलेटर तक की नौबत नजर आ रही थी।

सदर अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं दे रहे न्यूरोसर्जन डॉ. नवोदय जिंदल ने मरीज की तत्परता से जांच कराई और बिना किसी जटिल सर्जरी के, सटीक दवाइयों एवं गहन चिकित्सीय देखरेख से मरीज का इलाज शुरू किया। लगभग 10 दिनों की सघन चिकित्सा के बाद मरीज पूरी तरह खतरे से बाहर हैं और अपने पैरों पर चलने-फिरने में सक्षम हो चुके हैं।

निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, सरकारी अस्पताल में नाममात्र खर्च में हुआ इलाज: 

आमतौर पर ब्रेन हेमरेज और न्यूरो संबंधी बीमारियों के इलाज में निजी या कॉर्पोरेट अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना संभव नहीं होता। लेकिन सदर अस्पताल में मरीज को केवल कुछ आवश्यक बाहरी दवाइयों के मामूली खर्च पर यह जीवनरक्षक इलाज उपलब्ध हुआ।

परिजनों ने जताया आभार:

मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने पर उनकी पत्नी और परिजनों ने माननीय मुख्यमंत्री, माननीय स्वास्थ्य मंत्री, उपायुक्त समेत अस्पताल प्रशासन व डॉक्टरों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। भावुक होते हुए मरीज की पत्नी ने कहा कि निजी अस्पताल जाने की उनकी आर्थिक स्थिति नहीं थी, लेकिन सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके "सुहाग की रक्षा" कर नया जीवन दिया है।

चिकित्सक का संदेश:

न्यूरोसर्जन डॉ. नवोदय जिंदल ने बताया कि अस्पताल में सीमित संसाधनों के बावजूद टीम पूरी सतर्कता के साथ मरीजों को श्रेष्ठ उपचार देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सही चिकित्सीय देखभाल मिल जाए, तो स्ट्रोक और हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों से भी मरीजों को बचाया जा सकता है। अस्पताल में न्यूरो सेवाओं को भविष्य में और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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