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TribalJharkhand News Desk

सिमडेगा-गुमला बॉर्डर पर बसा गोंदलीपानी गांव :

सिमडेगा-गुमला बॉर्डर पर बसा गोंदलीपानी गांव :

विकास की किरण से दूर, 450 जनसंख्या के लिए सिर्फ एक कुआं और एक छोटा तालाब

सिमडेगा : जिला मुख्यालय से करीब 30-40 किलोमीटर दूर सिमडेगा और गुमला जिले के बॉर्डर पर बसा आसन बेड़ा गोंदलीपानी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव का दौरा करने तथा फिया फाउंडेशन, पाकरतांड के द्वारा सामाजिक सुरक्षा कैंप आयोजित करने के दौरान ग्रामीणों के साथ बातचीत करने पर पता चलता है कि यहां समस्याओं का अंबार लगा है। दुर्गम घाटी क्षेत्र से होकर गांव तक पहुंचने वाली सड़क की हालत बेहद खराब है। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गांव में लगभग साढ़े चार सौ की जनसंख्या निवास करती है, लेकिन पानी का साधन सिर्फ एक कुआं और एक छोटा तालाब है। इसके अलावा पानी का कोई सरकारी साधन नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि एक छोटा तालाब उन्होंने अपने से चंदा करके बनाया है। एक ही जल-मीनार जिसकी स्थिति भी ठीक नहीं है और उसका पंप ख़राब है काफी लम्बे समय से I

पेंशन नहीं, राशन मिल रहा है

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की स्थिति पर ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग 30-35 लोग पेंशन के हकदार हैं, लेकिन उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है। राशन की स्थिति पर ग्रामीणों ने कहा कि राशन सभी को मिल रहा है, लेकिन वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन नहीं मिल पा रही है।

50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है इलाज के लिए

स्वास्थ्य सुविधा की हालत और भी खराब है। गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। इलाज के लिए लोगों को 50 किलोमीटर दूर गुमला जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ता खराब होने के कारण रिजर्व गाड़ी करनी पड़ती है, जिसमें ज्यादा पैसा लगता है। फिर भी मजबूरी में जाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने वन विभाग और खेती-बाड़ी से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। बाजार दूर होने के कारण उन्हें अपने उत्पाद बेचने में भी दिक्कत होती है। गोंदलीपानी जैसे सीमांत गांवों की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि पेसा (PESA) और ग्राम सभा सशक्तिकरण की योजनाएं जमीनी स्तर पर कब पहुंचेंगी।

अगले 3 नवंबर को ग्रामीणों के साथ ग्राम-सभा की बैठक कर गाँव में ग्राम विकास योजना बनाने पर तथा गाँव के अन्य समस्याओं पर विस्तृत चर्चा करने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने की दिशा में कार्य करने का निर्णय लिया गया I

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