अफ्रीकी देश नाइजर में आठ महीने तक किडनैपरों के चंगुल में फंसे रहने के बाद Jharkhand के गिरिडीह जिले के बगोदर क्षेत्र के पांच मजदूर सुरक्षित घर लौट आए हैं। यह वापसी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष और भारत के विदेश मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों की देन है। इन मजदूरों की घर वापसी की खबर जैसे ही उनके परिवारों को मिली तो खुशियों की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक अनजान हालत में रहने वाले मजदूरों के वापस आने से उनके परिजन भावुक हो उठे। यह वापसी न केवल उनके परिवारों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए राहत की खबर है।
मजदूर संजय महतो ने अपने साथ हुए भयावह अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि किडनैपरों ने उन्हें जबरन 400 किलोमीटर दूर जंगल में ले जाकर आठ महीने तक रखा। अपहरण के दौरान उनके हाथ बांध दिए गए थे और आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी। जंगल ले जाते ही उनका मोबाइल फोन तोड़ दिया गया और पास मौजूद पैसे भी छीन लिए गए। शुरुआती दिनों में खाना-पीना किडनैपरों द्वारा दिया जाता था लेकिन बाद में उन्हें खाना बनाने के लिए सामग्री देकर स्वयं खाना बनाने और खाने को कहा गया। संजय ने बताया कि किडनैपरों ने कभी उनकी कोई पिटाई नहीं की, लेकिन घर वालों से बात करने की मनाही ने अंदर तक बेचैनी और चिंता पैदा कर दी थी। आठ महीनों की अलगाव और अनिश्चितता ने उनके मनोबल पर गहरा असर डाला।
झारखंड सरकार के श्रम विभाग के तहत काम कर रहे राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष की प्रमुख शिखा लाकड़ा ने पुष्टि की है कि गिरिडीह के बगोदर के ये पांच मजदूर अब सुरक्षित मुंबई पहुंच गए हैं। गिरिडीह के सहायक श्रम आयुक्त प्रवीण कुमार ने बताया कि 27 अप्रैल 2025 को प्रवासी नियंत्रण कक्ष को सूचना मिली थी कि नाइजर में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने वाली एक निजी कंपनी के लिए काम कर रहे पांच मजदूरों का अपहरण कर लिया गया है। इसके बाद सरकारी और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास शुरू किए गए। गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि आठ महीने बाद श्रमिकों को रिहा कर दिया गया है। प्रशासन की तत्परता और विदेश मंत्रालय के सहयोग से यह संभव हो पाया।
मजदूरों की घर वापसी से उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। आठ महीने की चिंता और इंतजार के बाद जब मजदूर सुरक्षित लौटे तो उनके परिजन भावुक हो उठे। परिवारों ने बताया कि अब वे अपने घर के सदस्यों को देख और उनके साथ समय बिताकर राहत महसूस कर रहे हैं। इस घटना ने यह भी उजागर किया कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सहायता के लिए सरकार किस हद तक प्रतिबद्ध है। अब मजदूरों की यह सुरक्षित वापसी दूसरों के लिए भी एक संदेश है कि सरकार हर संभव प्रयास करती है ताकि अपने नागरिकों को किसी भी संकट से मुक्त कराया जा सके। यह कहानी मानवता, साहस और प्रशासन की जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है।

