Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बताते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को फोन किया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने गोंडा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
फर्जी कॉल में हुआ उपमुख्यमंत्री से दुर्व्यवहार
मिली जानकारी के अनुसार, 15 नवंबर की रात करीब 9:50 बजे एक अज्ञात व्यक्ति ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को फोन किया। उसने खुद को झारखंड के मुख्यमंत्री बताते हुए उपमुख्यमंत्री से उनकी पत्नी से बात करने की जिद की। इस फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी पुलिस को एक पेन ड्राइव में सौंप दी गई है, जिसमें बातचीत स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और कॉल करने वाले की लोकेशन ट्रैक कर रही है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने दर्ज कराई FIR, मांगी कड़ी कार्रवाई
झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस घटना को गंभीर मानते हुए गोंडा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। FIR में कहा गया है कि यह घटना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की छवि को नुकसान पहुंचाने का एक प्रयास लगती है। इस प्रकार की हरकतें निंदनीय हैं और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। पुलिस ने भी तकनीकी जांच शुरू कर दी है ताकि आरोपी का पता लगाया जा सके और उसे कानूनी शिकंजे में लाया जा सके।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी सियासी गरमाहट
इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और गरम कर दिया है। झारखंड और कर्नाटक दोनों राज्यों की राजनीति में इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले को मुख्यमंत्री की छवि को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। वहीं समर्थक इसे राजनीतिक दुश्मनी का नतीजा बता रहे हैं। इस घटना ने यह सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या राजनीतिक नेताओं को इस तरह के फर्जी और भ्रामक कॉल्स से बचाने के लिए कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉल की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। आरोपी का पता लगाने के लिए कॉल डिटेल्स, मोबाइल टॉवर डेटा और अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में भी गलत पहचान और फर्जीवाड़ा कितना खतरनाक साबित हो सकता है। जनता भी उम्मीद कर रही है कि इस मामले में शीघ्र न्याय होगा।

