Jharkhand News: रविवार की रात रांची रेलवे स्टेशन का नजारा बेहद निराशाजनक और चिंताजनक था। रात लगभग 10 बजे रांची–लोहरदगा पैसेंजर ट्रेन स्टेशन पर खड़ी थी, लेकिन लोग इसे रैन बसेरे की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। कई लोग ट्रेन के अंदर ही बेंच पर चादर बिछाकर सो गए थे, जबकि कुछ लोग ट्रेन के पास खुले में शौच करते नजर आए। यह सब स्टेशन परिसर में यात्रियों की आंखों के सामने हो रहा था, लेकिन न तो रेलवे पुलिस और न ही स्टाफ के किसी कर्मचारी ने इसे रोकने की कोशिश की। इस स्थिति ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रातभर खड़ी ट्रेन के दरवाजे खुले रहना रेलवे सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के बराबर है। रेलवे के स्पष्ट निर्देश हैं कि रात में स्टैंडिंग पर खड़ी ट्रेनों के सभी दरवाजे बंद होने चाहिए ताकि कोई असामाजिक तत्व या संदिग्ध व्यक्ति ट्रेन में प्रवेश न कर सके। हालांकि, रविवार की रात यह नियम पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। ट्रेन की सभी बोगियों के दरवाजे खुले थे और कोई भी व्यक्ति बिना टिकट या पहचान पत्र के ट्रेन में आ-जा सकता था। कई ऐसे लोग, जिनका रेलवे से कोई संबंध नहीं था, ट्रेन को अपना ठिकाना बना बैठे। इससे चोरी, छेड़छाड़ और अन्य आपराधिक घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

रात 10.30 बजे के बाद स्थिति और भी शर्मनाक हो गई जब लोग ट्रेन के नजदीक खुले में शौच करने लगे। यह अस्वच्छता स्टेशन परिसर में खुलेआम हो रही थी, जहां दिनभर हजारों यात्री आते-जाते हैं। खुले में शौच की यह स्थिति केवल स्वच्छता की समस्या नहीं है, बल्कि यह रेलवे परिसर में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। बावजूद इसके, न तो टीटीई, न स्टेशन मास्टर और न ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कोई जवान मौके पर नजर आए जो इस हालात को सुधार सकें।
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में इतनी लापरवाही क्यों हो रही है, यह एक बड़ा सवाल है। रात में प्लेटफार्म और संटिंग लाइन की निगरानी अक्सर कमजोर हो जाती है। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी कई बार अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं या वास्तविक निगरानी नहीं कर पाते। आरपीएफ की गश्ती भी कई दिनों से कम दिखाई दे रही है। आमतौर पर ऐसी ट्रेनें बैरिंग में खड़ी की जाती हैं, जहां सुरक्षा का विशेष इंतजाम होता है, लेकिन रविवार की रात यह व्यवस्था पूरी तरह से लापता थी। इससे यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
इस गंभीर स्थिति को सुधारने की सख्त जरूरत है। सबसे पहले रात में खड़ी ट्रेनों के सभी दरवाजों को अनिवार्य रूप से बंद किया जाना चाहिए ताकि कोई भी असामाजिक तत्व ट्रेन में प्रवेश न कर सके। आरपीएफ की गश्ती और सतर्कता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह की घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके। ऐसे असामाजिक कृत्यों को करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही स्टेशन परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं ताकि यात्रियों को एक सुरक्षित और स्वच्छ माहौल मिल सके। रेलवे प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेकर शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाएं न दोहराई जाएं।

