Jharkhand की राजधानी रांची से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित पतरहतू गांव में मंगलवार को अचानक एक शियाल के जंगल से भटक कर आवासीय क्षेत्र में घुसने से हड़कंप मच गया। जब गांव के लोगों ने शियाल को बीच गांव में घूमते देखा तो वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपनी सुरक्षा के लिए भागे। इस अफरातफरी से घबराया शियाल पास के एक सरकारी स्कूल के परिसर में चला गया। उस समय स्कूल में लगभग पचास से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।
शियाल जब स्कूल के एक कमरे में घुसा तो ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए उस कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ताकि शियाल बाहर न निकल सके और किसी को नुकसान न पहुंचा सके। इसके बाद स्थानीय पुलिस और वन विभाग को तत्काल इस घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही रांची के बिरसा मुंडा बायोलॉजिकल पार्क से एक विशेष रेस्क्यू टीम पतरहतू गांव पहुंची। टीम ने स्थिति का आकलन कर शियाल को सुरक्षित पकड़ने की तैयारी शुरू की। लगभग तीन घंटे की कड़ी मेहनत के बाद वन विभाग की टीम ने शियाल को सफलतापूर्वक स्कूल के कमरे से बाहर निकाला। इस दौरान यह खास ध्यान रखा गया कि न तो जानवर को कोई चोट पहुंचे और न ही ग्रामीणों को कोई नुकसान हो।
घटना के समय स्कूल में पचास से अधिक बच्चे मौजूद थे। शियाल के कमरे में आने की खबर मिलते ही स्कूल के शिक्षक तुरंत सावधानी बरतते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित रूप से दूसरे कमरों में ले गए। शिक्षकों की इस त्वरित और सही सोच के कारण न तो किसी बच्चे को और न ही गांव के किसी व्यक्ति को कोई चोट लगी। ग्रामीणों के सहयोग और शिक्षकों की सूझबूझ से एक बड़ी त्रासदी टल गई। वन विभाग की टीम ने शियाल को पकड़ने के बाद उसे पिंजरे में बंद कर बिरसा मुंडा बायोलॉजिकल पार्क ले जाया जहां उसका मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पूरे गांव में इस घटना के बाद राहत की सांस ली गई।
यह पहली बार नहीं है जब झारखंड के सिली क्षेत्र में कोई जंगली जानवर आवासीय इलाकों में घुसा हो। इससे पहले जून 2025 में सिली क्षेत्र के एक गांव में बाघ दिखा था। 25 जून 2025 को जंगल से भटक कर एक बाघ सिली थाना क्षेत्र के मरदू गांव के पुरान चंद महतो के घर में पहुंच गया था। उस समय लगभग 10 से 12 घंटे चली एक बचाव कार्रवाई के बाद वन विभाग और पालमू टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों की मदद से बाघ को सुरक्षित पकड़ा गया और उसे वापस जंगल में छोड़ा गया था। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि वन्यजीवों और मानव बसावट के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और इसके लिए सतर्कता आवश्यक है।

