इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ बच्चा प्रसाद सिंह, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अंजना भारती, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनिता कुजूर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ राजा कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिले में तेजी से बढ़ रहे स्ट्रीट फूड कारोबार को देखते हुए यह अभियान शुरू किया गया है, ताकि आम लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
फूड सेफ्टी व्हीकल आधुनिक जांच उपकरणों से लैस है। इसके माध्यम से मौके पर ही खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच की जा सकेगी। विशेष रूप से गुपचुप, पानीपुरी, चाट, छोला, फास्ट फूड और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और मिलावट की जांच होगी। जांच के दौरान खाद्य सामग्री में इस्तेमाल होने वाले पानी, तेल, मसाले और अन्य सामग्री की भी जांच की जाएगी।
उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बड़ी संख्या में बच्चे, युवा और आम नागरिक करते हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमित रूप से जांच अभियान चलाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने आगे कहा कि कई बार मिलावटी और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के कारण लोगों को फूड पॉइजनिंग, पेट संबंधी बीमारियों और संक्रमण का सामना करना पड़ता है। इस अभियान के जरिए न केवल मिलावटखोरों पर कार्रवाई होगी, बल्कि खाद्य विक्रेताओं को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि जिले में बिकने वाला हर खाद्य पदार्थ खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
सिविल सर्जन डॉ बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि गर्मी के मौसम में खुले और दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। खासकर बच्चों और युवाओं में फूड पॉइजनिंग की शिकायतें अधिक देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है और इससे लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम समय-समय पर जिले के बाजारों, स्कूलों के आसपास लगे ठेलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाकर जांच करेगी। जिन दुकानदारों के पास खाद्य लाइसेंस नहीं होगा या जो स्वच्छता मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों को यह भी बताया जाएगा कि वे किस प्रकार स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की पहचान कर सकते हैं।
जिला प्रशासन ने सभी खाद्य विक्रेताओं से अपील की है कि वे साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, खाद्य सामग्री को ढककर रखें और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें। प्रशासन ने यह भी कहा कि सभी विक्रेता आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण जरूर कराएं। वहीं आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे खुले और संदिग्ध खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें तथा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
फूड सेफ्टी व्हीकल की शुरुआत को जिले में जनस्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल मिलावटखोरी पर रोक लगेगी, बल्कि लोगों में स्वच्छ और सुरक्षित भोजन के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। आने वाले दिनों में यह अभियान जिले के हर प्रखंड और पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाएगा।