Iran War : पश्चिम एशिया युद्ध के असर से जूझ रहे मालदीव को भारत ने SAARC करेंसी स्वैप के तहत दी राहत, ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का दिखा असर
Iran War के कारण बिगड़े आर्थिक हालात के बीच भारत ने मालदीव को ₹3,000 करोड़ की वित्तीय मदद देकर एक बार फिर संकटमोचक की भूमिका निभाई है। SAARC करेंसी स्वैप के जरिए यह सहायता मालदीव की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में अहम साबित होगी।
Iran War : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, खासकर ईरान से जुड़े तनाव, का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इस संकट की चपेट में भारत का छोटा पड़ोसी देश मालदीव भी आ गया है, जहां आर्थिक हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे कठिन समय में भारत ने एक बार फिर अपने पड़ोसी के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है।
भारत सरकार ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के तहत करेंसी स्वैप सुविधा के जरिए मालदीव को करीब ₹3,000 करोड़ की तत्काल सहायता देने को मंजूरी दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब मालदीव विदेशी मुद्रा की भारी कमी और भुगतान संतुलन के दबाव से जूझ रहा है।
क्या है करेंसी स्वैप सुविधा और कैसे मिलेगी राहत?
SAARC करेंसी स्वैप एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत सदस्य देशों को आपात स्थिति में विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराई जाती है। इससे उन्हें बाजार से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेने की जरूरत कम पड़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत द्वारा दी गई यह सहायता मालदीव को अपने आयात, खासकर तेल और जरूरी वस्तुओं की खरीद में मदद करेगी। साथ ही इससे देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी सहयोग मिलेगा।
ईरान युद्ध का गहरा असर
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था वाले मालदीव पर पड़ा है।
हाल के महीनों में मालदीव आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने देश के खर्च को और बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसियों ने भी मालदीव की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है और उसके ऋण चुकाने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
भारत-मालदीव संबंध: भरोसे की मिसाल
भारत और मालदीव के संबंध हमेशा से मजबूत और भरोसेमंद रहे हैं। संकट के समय भारत ने कई बार मालदीव की मदद की है।
मालदीव सरकार ने भारत द्वारा दी गई इस नई सहायता का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का प्रतीक बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति इस फैसले में साफ नजर आती है, जहां पड़ोसी देशों की स्थिरता और विकास को प्राथमिकता दी जाती है।
पहले भी मिल चुकी है मदद
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने मालदीव की आर्थिक मदद की हो।
- अक्टूबर 2024 में भारत ने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी थी
- 2025 में दो बार 50 मिलियन डॉलर के ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराए गए
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 565 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन की घोषणा की गई
इन सभी कदमों ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभाई है।
भारत ने सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट के समय भी मालदीव की मदद की है।
साल 2014 में माले में पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। उस समय भारतीय नौसेना के जहाज INS Deepak के जरिए हजारों टन पीने का पानी भेजा गया था। इसके अलावा खराब जल संयंत्र को भी ठीक करने में मदद की गई थी।
यह घटनाएं दिखाती हैं कि भारत और मालदीव के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर भी मजबूत हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह मदद मालदीव को तत्काल राहत जरूर देगी, लेकिन उसे दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों पर भी ध्यान देना होगा।
पर्यटन क्षेत्र को फिर से मजबूत करना, आय के नए स्रोत विकसित करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना मालदीव के लिए जरूरी होगा।
भारत की यह पहल न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करती है, बल्कि दक्षिण एशिया में सहयोग और साझेदारी का एक मजबूत संदेश भी देती है।
