Tata Steel Combi Mill Inauguration : मई में होगा लोकार्पण, अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह मिल भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को देगी नई मजबूती
Tata Steel Combi Mill Inauguration : टाटा स्टील की 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनी कांबी मिल का उद्घाटन मई 2026 में मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा किया जाएगा। 0.5 मिलियन टन क्षमता वाली यह यूनिट वायर रॉड और मर्चेंट बार्स के उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
Tata Steel Combi Mill Inauguration : देश के औद्योगिक विकास में एक बड़ा कदम उठाते हुए Tata Steel अपनी नई ‘कांबी मिल’ को शुरू करने जा रही है। लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक मिल का उद्घाटन मई 2026 में झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा किया जाएगा। हालांकि उद्घाटन की अंतिम तारीख मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा तय की जाएगी।
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदरा रामम ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मिल इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट लिमिटेड (ISWP) परिसर में स्थापित की गई है और वर्तमान में इसका रैंप-अप चरण जारी है। 0.5 मिलियन टन सालाना उत्पादन क्षमता के साथ यह यूनिट देश के स्टील सेक्टर में एक नई दिशा तय करेगी।
‘कांबी मिल’ यानी Combination Mill एक ऐसी आधुनिक उत्पादन इकाई है, जो एक ही छत के नीचे दो अलग-अलग उत्पाद—वायर रॉड्स और मर्चेंट बार्स—का निर्माण कर सकती है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
🔹 दोहरा उत्पादन (Dual Production)
यह मिल एक साथ या अलग-अलग समय में वायर रॉड्स और रीबार्स का उत्पादन कर सकती है, जिससे उत्पादन क्षमता और लचीलापन दोनों बढ़ता है।
🔹 लचीलापन (Flexibility)
बाजार की मांग के अनुसार यह मिल अपने उत्पादन मोड को तेजी से बदल सकती है, जिससे कंपनी को स्टॉक मैनेजमेंट में बड़ी सुविधा मिलती है।
🔹 हाई स्पीड टेक्नोलॉजी
इस मिल में वायर रॉड्स को 100 मीटर प्रति सेकंड से अधिक गति से रोल किया जा सकता है, जो इसे अत्याधुनिक बनाता है।
कांबी मिल से बनने वाले उत्पाद देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
🔸 वायर रॉड्स (Wire Rods)
इनका उपयोग ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में नट-बोल्ट, टायर बीड्स, स्प्रिंग्स और तार बनाने में होता है।
🔸 मर्चेंट बार्स / TMT (Rebars)
इनका उपयोग ऊंची इमारतों, पुलों, सड़कों और बांधों के निर्माण में किया जाता है।
टाटा स्टील की इस मिल में ‘थर्मेक्स’ (Thermex) और आधुनिक क्वेंचिंग तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे सरिया बाहर से मजबूत और अंदर से लचीला बनता है। इसके अलावा, मिल की अधिकांश प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑटोमेटेड हैं, जिससे मानवीय त्रुटि कम होती है और सुरक्षा का स्तर बढ़ता है।
यह कांबी मिल सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देती है। इसमें आधुनिक रीहीटिंग फर्नेस का उपयोग किया गया है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। यह पहल ‘ग्रीन स्टील’ की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस परियोजना से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इस मिल में उत्पादित स्टील वैश्विक मानकों के अनुरूप होगा, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिल के शुरू होने से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी और यह देश को स्टील उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
टाटा स्टील की कांबी मिल सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के विकास का एक मजबूत स्तंभ बनने जा रही है। आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ यह मिल आने वाले समय में देश के निर्माण कार्यों को नई दिशा देगी।
