Jharkhand में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने अब पूरी तरह से सख्त रुख अपना लिया है। हाल के दिनों में जिस तरह की कार्रवाइयां सामने आई हैं, उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि अब अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ जैसे कदमों से लेकर सड़कों पर अपराधियों की सार्वजनिक परेड तक, हर कार्रवाई एक संदेश दे रही है कि अपराध करने वालों को अब सीधे और सख्त तरीके से जवाब मिलेगा। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका राज्य की पहली महिला डीजीपी तदाशा मिश्रा की मानी जा रही है, जिनके नेतृत्व में पुलिस ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।
एनकाउंटर और परेड से अपराधियों में खौफ का माहौल
झारखंड के कई जिलों में पुलिस की सख्ती का असर साफ दिखाई दे रहा है। धनबाद में प्रिंस खान गैंग के गुर्गों के साथ मुठभेड़ में दो अपराधियों को घायल कर गिरफ्तार किया गया, जो कई गंभीर मामलों में वांछित थे। वहीं, पलामू में कुख्यात अपराधी फैज खान को पुलिस ने भागते वक्त पैर में गोली मारकर पकड़ लिया। जमशेदपुर और हजारीबाग में भी अपराधियों को सड़कों पर परेड कराते हुए कोर्ट ले जाया गया, जिससे आम लोगों के बीच पुलिस का भरोसा बढ़ा है। रामनवमी के दौरान पत्थरबाजी करने वालों को भी खुलेआम परेड कर जेल भेजा गया, जिसने त्योहारों में उपद्रव करने वालों को साफ चेतावनी दे दी।
यूपी मॉडल की तर्ज पर कानून व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, झारखंड में उत्तर प्रदेश मॉडल को अपनाने की कोशिश की जा रही है, जहां अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों के मनोबल को तोड़ने के लिए हर स्तर पर कार्रवाई कर रही है। लगातार एनकाउंटर, पैर में गोली मारना और सार्वजनिक परेड जैसे कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इसका असर यह हो रहा है कि अपराधी अब किसी भी वारदात को अंजाम देने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर हो रहे हैं।
सख्ती पर उठे सवाल, लेकिन जनता का समर्थन बरकरार
हालांकि पुलिस की इस नई रणनीति पर कुछ नेताओं और संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। बलियापुर में पत्थरबाजों की परेड को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने नाराजगी जताई और इस तरह की कार्रवाई पर आपत्ति भी दर्ज कराई। बावजूद इसके, आम जनता और व्यापारिक वर्ग पुलिस की इस सख्ती का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि लंबे समय से बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए ऐसे कड़े कदम जरूरी हैं। कुल मिलाकर झारखंड में पुलिस का यह नया रुख कानून-व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
