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Jharkhand News: एक करोड़ का इनामी नक्सली प्रशांत बोस की जेल में मौत, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Jharkhand News: झारखंड के Ranchi स्थित Birsa Munda Central Jail में शुक्रवार सुबह एक बड़ी खबर सामने आई, जहां एक करोड़ के इनामी नक्सली नेता प्रशांत बोस की मौत हो गई। सुबह करीब 4 बजे उसने अंतिम सांस ली, जिसके बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशांत बोस लंबे समय से जेल में बंद था और उसकी तबीयत को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही थीं। मौत के बाद प्रशासन ने तुरंत उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स अस्पताल भेज दिया। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है।

नक्सली संगठन का बड़ा चेहरा, ‘किशन दा’ के नाम से पहचान

प्रशांत बोस भाकपा (माओवादी) संगठन का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा था। उसे संगठन में ‘किशन दा’ के नाम से जाना जाता था और वह लंबे समय तक पोलित ब्यूरो का सदस्य रहा। माना जाता था कि वह महासचिव नंबला केशव राव के बाद संगठन का दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता था। संगठन के रणनीतिक फैसलों में उसकी अहम भूमिका रही और वह माओवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहा। उसकी पहचान एक थिंक टैंक लीडर के रूप में भी थी, जो नक्सली गतिविधियों की रणनीति तैयार करता था।

कई राज्यों में फैला नेटवर्क, 200 से ज्यादा वारदातों में भूमिका

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, प्रशांत बोस का नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था। झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों में उसकी भूमिका बताई जाती है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला बोस पहले माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) से जुड़ा था। वर्ष 2004 में एमसीसीआई और पीपुल्स वार ग्रुप के विलय के बाद बने भाकपा (माओवादी) में उसे पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया। उसकी रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता के चलते संगठन में उसका कद लगातार बढ़ता गया।

गिरफ्तारी से लेकर मौत तक, सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम कड़ी

प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से उसकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जो उसकी गंभीरता और प्रभाव को दर्शाता है। करीब 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके बोस लंबे समय से जेल में बंद था। उसकी मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, क्योंकि वह संगठन के कई अहम राज और रणनीतियों से जुड़ा हुआ था। माना जा रहा है कि उसकी मौत से नक्सली नेटवर्क पर असर पड़ सकता है, लेकिन साथ ही सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित गतिविधि को लेकर अलर्ट मोड में आ गई हैं।

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नेहा यादव पिछले पाँच वर्षों से एक प्रतिभाशाली और समर्पित न्यूज़ आर्टिकल राइटर के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से शोध कर, समाचारों को सटीक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अपना अनूठा अंदाज विकसित किया है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और आकर्षक है जिससे पाठकों को जानकारी समझने में आसानी होती है। नेहा हर दिन नवीनतम घटनाओं और विषयों पर अपडेट रहती हैं और उन्हें व्यापक दृष्टिकोण से दर्शाने का प्रयास करती हैं। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें न्यूज़ वेबसाइट पर विश्वसनीय और सम्मानित लेखक बना दिया है। वे लगातार समाज के मुद्दों को उजागर करने और जागरूकता फैलाने में योगदान दे रही हैं।
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