LPG Booking Complaint: देश में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर कुछ जगहों पर दिक्कतें सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश में सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए झारखंड सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। राज्य में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर स्थापित किया है, जहां लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह व्यवस्था पारदर्शिता और त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1967 जारी
झारखंड सरकार ने आम लोगों की सुविधा के लिए कॉल सेंटर नंबर 1967 जारी किया है, जिस पर LPG सिलेंडर से जुड़ी किसी भी समस्या की शिकायत दर्ज की जा सकती है। धनबाद के जिला आपूर्ति अधिकारी पंकज कुमार के अनुसार, इस नंबर पर घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार के LPG सिलेंडरों से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। इसके अलावा पेट्रोल और केरोसिन से जुड़ी समस्याओं को भी इसी माध्यम से रिपोर्ट किया जा सकता है। यह कंट्रोल रूम प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कार्य करेगा और प्राप्त शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
PDS के माध्यम से केरोसिन वितरण की योजना
राज्य सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से केरोसिन के वितरण की भी योजना बनाई है। पूरे झारखंड में कुल 9,72,000 लीटर केरोसिन वितरित किया जाएगा, जिसमें धनबाद जिले को 72,000 लीटर का आवंटन किया गया है। जिला आपूर्ति विभाग ने इस संबंध में अपनी मांग राज्य सरकार को भेज दी है। यह वितरण PDS दुकानों के जरिए किया जाएगा, जिससे जरूरतमंद लोगों तक ईंधन आसानी से पहुंच सके। हालांकि यह केरोसिन मुफ्त में उपलब्ध नहीं होगा और इसके लिए निर्धारित कीमत चुकानी होगी।
अगले सप्ताह से शुरू हो सकता है वितरण
अधिकारियों के अनुसार केरोसिन का वितरण अगले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण और जरूरतमंद क्षेत्रों में ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। सरकार का प्रयास है कि LPG और केरोसिन दोनों की सप्लाई सुचारू बनी रहे और किसी भी तरह की शिकायत को समय पर हल किया जाए। इस पहल से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है और आपूर्ति प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
