Jharkhand के वन एवं पर्यावरण विभाग ने राज्य के जंगलों में खाली पड़ी भूमि पर हरियाली बढ़ाने के लिए एक नई और आधुनिक पहल शुरू की है। इसके तहत सीड बॉल तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिसमें मिट्टी के छोटे गोलों के अंदर बीज रखकर उन्हें जंगलों में फैलाया जाता है। इस योजना के अंतर्गत करीब 10 लाख सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है बल्कि राज्य की पारिस्थितिकी को संतुलित करने में भी सहायक साबित होगा।
ग्रामीणों की भागीदारी और रोजगार का अवसर
इस अभियान में गुमला, चाईबासा और लातेहार के ग्रामीणों को शामिल किया जाएगा। अप्रैल से जून के बीच इन क्षेत्रों के लोगों को सीड बॉल बनाने का कार्य सौंपा जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। वन विभाग का उद्देश्य है कि इस योजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जाए। यह एक ऐसा मॉडल है जिसमें विकास और रोजगार दोनों साथ साथ आगे बढ़ते हैं।
ड्रोन और हेलिकॉप्टर से होगा बीजारोपण
बारिश शुरू होने से पहले तैयार किए गए सीड बॉल को जंगलों में फैलाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए हेलिकॉप्टर और ड्रोन का उपयोग किया जाएगा ताकि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक आसानी से बीज पहुंचाए जा सकें। इस वर्ष बांस, शीशम, साल और महुआ जैसे महत्वपूर्ण वनस्पतियों के बीजों को प्राथमिकता दी गई है। सामाजिक वानिकी विशेषज्ञों के अनुसार जैसे ही मिट्टी में नमी आती है ये बीज अंकुरित होने लगते हैं और लगभग 70 प्रतिशत तक पौधे बनने की संभावना रहती है।
पर्यावरण और वन्य जीवन के लिए लाभकारी पहल
सीड बॉल तकनीक न केवल जंगलों को पुनर्जीवित करने में मदद करेगी बल्कि वन्य जीवों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। खासतौर पर बांस के पौधे हाथियों के लिए भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं जिससे वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर कम जाएंगे। इससे मानव और हाथियों के बीच होने वाले संघर्ष में कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा यह तकनीक दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में पहले से उपयोग में लाई जा रही है और अब झारखंड में भी सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक स्थायी और प्रभावी समाधान बन सकती है।
