Jharkhand: झारखंड सरकार ने पुराने श्रम कानूनों को सरल बनाकर केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम संहिताओं को लागू करने की दिशा में तेज कदम बढ़ाए हैं। यह जानकारी झारखंड विधानसभा में शनिवार को प्रस्तुत झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 में दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार अप्रैल तक आवश्यक नियमावली तैयार कर इन श्रम संहिताओं को प्रभावी बनाने की योजना पर काम कर रही है। इन सुधारों को राज्य के श्रम बाजार के लिए निर्णायक माना जा रहा है। हालांकि, इनके क्रियान्वयन से जुड़े प्रभाव और चुनौतियों को भी रिपोर्ट में विस्तार से रेखांकित किया गया है।
वेतन संहिता से बढ़ेगा खर्च, उद्योगों पर पड़ेगा असर
रिपोर्ट के मुताबिक, वेतन संहिता 2019 के तहत मूल वेतन कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य किया गया है। इससे उन क्षेत्रों में नियोक्ताओं की लागत लगभग 8 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जहां भत्तों का हिस्सा वेतन संरचना में अधिक है। झारखंड के खनन, इस्पात और निर्माण जैसे प्रमुख उद्योगों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना है। राज्य का कोयला क्षेत्र अकेले 85 हजार से अधिक औपचारिक श्रमिकों को रोजगार देता है, जबकि अनौपचारिक आश्रित कार्यबल की संख्या इससे लगभग ढाई गुना अधिक है। ऐसे में वेतन संरचना में बदलाव से उद्योगों की वित्तीय रणनीति पर असर पड़ सकता है।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं
नई श्रम संहिताओं के तहत गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की योजना है। साथ ही, छह वर्ष से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव है। ईएसआईसी कवरेज का विस्तार भी बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जिससे झारखंड के बड़े हिस्से में फैले अनौपचारिक कार्यबल को औपचारिक ढांचे में लाने में मदद मिलेगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि नियम अधिसूचित होने तक नियोक्ताओं को दोहरी अनुपालन प्रणाली के तहत काम करना पड़ेगा, जिससे अनिश्चितता की स्थिति बन सकती है। विशेषकर हस्तशिल्प, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण जैसे एमएसएमई क्षेत्रों के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि ये कम मार्जिन पर काम करते हैं।
कार्यस्थल सुरक्षा पर जोर, जागरूकता अभियान की जरूरत
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 के तहत खतरनाक उद्योगों में 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट और वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान किया गया है। इससे बीमारियों की समय रहते पहचान और कार्यस्थल की स्थितियों में सुधार की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा नियमों का विस्तार करने के लिए पर्याप्त निवेश और जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार को एकीकृत डिजिटल अनुपालन पोर्टल विकसित करने और नियमों की शीघ्र अधिसूचना पर प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह झारखंड की अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।
