Jharkhand News: जमशेदपुर के अपराध जगत में विक्रम शर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उसके खिलाफ जिले में 20 से अधिक अपराध दर्ज हैं। अधिकांश मामलों में वह बरी हो चुका है। वह वर्तमान में व्हाइट कॉलर अपराधों में सक्रिय था। 2017 में उसे देहरादून से जमशेदपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय SSP जमशेदपुर अनुूप टी. मैथ्यू पदस्थ थे।
विक्रम शर्मा का कनेक्शन कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह से रहा है। वह अखिलेश सिंह का आपराधिक गुरु माना जाता था। विक्रम मूलतः देहरादून, उत्तराखंड का निवासी है और उसने जिले के एशियाना इलाके में फ्लैट का स्वामित्व रखा हुआ था। दस साल की भागमभाग के बाद, पुलिस ने 15 अप्रैल 2017 को उसे देहरादून से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ दर्ज प्रमुख मामलों में टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जैराम सिंह की हत्या, श्रीलेथर्स के मालिक आशिष डे की हत्या, रवि चौरसिया पर फायरिंग, सत्येंद्र सिंह के ससुराल पर फायरिंग और परमजीत सिंह की हत्या शामिल हैं।
जेल से रिहाई और फिर कोर्ट में सक्रियता
विक्रम शर्मा को 2017 से 2021 तक रांची की होटवार जेल में रखा गया। 30 जनवरी 2021 को उसे जमानत मिली। जमानत की शर्त यह थी कि वह जमशेदपुर कोर्ट में लंबित मामलों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा। जेल से रिहाई के बाद विक्रम ने इंटरनेट पर सक्रियता जारी रखी और अपने आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से प्रभाव बनाए रखा। वह और उसका भाई अर्जिव शर्मा ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या के मामले में आरोपी रहे। इस मामले में हरीश अरोड़ा को उम्रकैद की सजा मिली, जबकि विक्रम, अखिलेश और मंटू बरी हुए।
गैंगस्टर के जरिए अपने हित साधता रहा
विक्रम शर्मा ने गैंगस्टर अखिलेश सिंह का इस्तेमाल अपने हित साधने के लिए किया। उसके परिचितों का कहना है कि विक्रम धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहा और अकसर अखिलेश सिंह को धार्मिक आयोजनों में अपने साथ ले जाता था। 2008 में जमशेदपुर में पुलिस के खिलाफ जन आक्रोश पैदा करने और SP के ट्रांसफर के लिए प्रमुख व्यक्तियों के घर और दफ्तरों पर फायरिंग करवाई गई। इसके अलावा, कार्तिक मुंडा, जो पहले अखिलेश सिंह के लिए शूटर था, विक्रम का निशाना बना। लेकिन कार्तिक पुलिस छापे के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर मारा गया।
जमशेदपुर में अपराध का लंबा इतिहास
विक्रम शर्मा का प्रभाव जमशेदपुर के आपराधिक और राजनीतिक परिदृश्य पर लंबे समय तक रहा। उसके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, फायरिंग और अन्य संगठित अपराध शामिल हैं। वह राजनीतिक पार्टियों से भी जुड़ा रहा और अपने नेटवर्क के माध्यम से अपने प्रभाव को बढ़ाता रहा। उसके जीवन और गतिविधियों ने जिले में अपराध और भय का माहौल लंबे समय तक बनाए रखा। कार्तिक मुंडा की मौत, अखिलेश सिंह के साथ संबंध और होटवार जेल से रिहाई उसके जीवन की कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो आज भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

