Coal India Production Target: वित्तीय वर्ष 2025-26 कोल इंडिया के लिए कई चुनौतियां लेकर आया है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक कोयले का उत्पादन लगातार घटा है, जिससे कंपनी के 875 मिलियन टन के महत्वाकांक्षी उत्पादन लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल हो गया है। खराब मौसमी हालात, भूमि अधिग्रहण में अड़चनें और बिजली की कमजोर मांग के कारण पिछले वर्षों की वृद्धि दर में गिरावट आई है, जिससे कोयला कंपनियां अपने निर्धारित लक्ष्यों से पीछे रह गई हैं। मंत्रालय ने तो स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उत्पादन बढ़ाकर पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को पार किया जाए, लेकिन हकीकत में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
झारखंड की तीन प्रमुख कोयला कंपनियों में बीसीसीएल का उत्पादन 18.3 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, सीसीएल में 13.28 प्रतिशत और ईसीएल में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बीसीसीएल अपने 46 मिलियन टन के लक्ष्य से काफी दूर, केवल 37 मिलियन टन के करीब उत्पादन कर पाएगा। इस कमी की जानकारी मंत्रालय को भी दे दी गई है। लगभग सभी सहायक कंपनियां अपने उत्पादन लक्ष्यों से पीछे चल रही हैं, जो देश की कोयला उत्पादन स्थिति को और भी कमजोर बनाती है।
कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश को कॉकिंग कोयले की आवश्यकता है और सभी कोयला कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, कोयला उत्पादन में गिरावट की मुख्य वजहें लगातार भारी और लंबी अवधि तक चली मानसूनी बारिशें हैं, जिन्होंने खनन कार्यों को प्रभावित किया है। साथ ही बिजली क्षेत्र से कोयले की मांग में कमी और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का बढ़ता प्रभाव भी इस गिरावट के पीछे हैं। भूमि अधिग्रहण में देरी और पर्यावरण मंजूरी की समस्याएं भी उत्पादन में रुकावटें पैदा कर रही हैं। मंत्रालय को यह भी चिंता है कि पावर प्लांटों और पिटहेड्स पर कोयले का स्टॉक संतोषजनक है, लेकिन यह बढ़ोतरी उत्पादन के कारण नहीं बल्कि कम डिपैच के कारण हुई है।
कोल इंडिया के अध्यक्ष बी. सैराम ने कहा है कि उत्पादन लक्ष्यों की समीक्षा कर सभी कोयला कंपनियों को सूचित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में पिछले वर्ष से अधिक कोयला उत्पादन और डिपैच सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए हेडक्वार्टर से दैनिक निगरानी की जा रही है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियां और चुनौतियां बड़ी हैं, परंतु कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। अब यह देखना होगा कि कोल इंडिया अपने वित्तीय वर्ष के लक्ष्य को कितना सफलतापूर्वक पूरा कर पाती है।

