Jharkhand के धार्मिक विरासत में भगवान राम के मंदिरों का खास स्थान है। इनमें सबसे प्रमुख हैं रांची के टापोवन राम-जानकी मंदिर, जिसे झारखंड की ‘मिनी अयोध्या’ कहा जाता है। यह लगभग 286 साल पुराना मंदिर अयोध्या राम मंदिर की तर्ज पर पुनर्निर्माणाधीन है, जहां मकराना मार्बल से 13 से अधिक शिखर बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा शुरू किए गए इस 100 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के पूरा होने तक भक्तों की भीड़ में चार चांद लगेंगे। इसके अलावा चूतिया, पतारतु रोड, निवरनपुर जैसे अन्य मंदिर भी अयोध्या शैली के स्थापत्य और भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां राम नवमी के दौरान विशाल मेले और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जो लाखों भक्तों को आकर्षित करते हैं।
झारखंड के अन्य जिलों में भी राम मंदिरों का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। धनबाद का श्री रामराज मंदिर अपनी श्वेत संगमरमर की मूर्तियों और कलात्मक खंभों के लिए प्रसिद्ध है। यह कोयला क्षेत्र का सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र है। सिमडेगा के रामरेखा धाम को भगवान राम के वनवास से जोड़ा जाता है, जहां उनकी पदचाप, प्राचीन अग्निकुंड और सिता के रसोई स्थान देखे जा सकते हैं। वहीं पश्चिमी सिंहभूम का रामतीर्थ मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक महत्ता से परिपूर्ण है, जहां मकर संक्रांति के मेले में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। कोडरमा का राम मंदिर अपनी साफ-सफाई, भव्य सजावट और राजस्थान की वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
झारखंड में नए मंदिर भी तेजी से बन रहे हैं, जो आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला का मिश्रण हैं। रांची के पास ओरमांझी में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बन रहा राम मंदिर इसका उदाहरण है, जिसमें उन्नत तकनीकी सुविधाएं, बड़े उद्यान और ध्यान केंद्र शामिल होंगे। बंडू का सूर्य मंदिर, जिसे ‘झारखंड का कोणार्क’ कहा जाता है, रामायण से जुड़ा हुआ है और इसका अनोखा रथ जैसा स्थापत्य इसे विश्व प्रसिद्ध बनाता है। रामकुंड की धार्मिक महत्ता भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। इस प्रकार झारखंड में राम मंदिर न केवल आध्यात्मिक श्रद्धा के केन्द्र हैं, बल्कि सांस्कृतिक और स्थापत्य धरोहर के भी अभिन्न अंग हैं।

