Jharkhand के सरंडा जंगल एक बार फिर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुए भीषण मुठभेड़ को लेकर चर्चा में हैं। सुरक्षा बलों ने यहां एक और नक्सली को ढेर कर बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले करीब 30 घंटे से इलाके में सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और आसपास के पूरे क्षेत्र को घेरकर गहन तलाशी ली जा रही है। मुठभेड़ में मारे गए नक्सली की पहचान की प्रक्रिया अभी चल रही है। राहत की बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों की ओर से औपचारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इसे नक्सल विरोधी अभियान में एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह मुठभेड़ झारखंड सुरक्षा बलों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। ऑपरेशन ‘मेगाबुरु’ के तहत कोबरा बटालियन 209, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 16 नक्सलियों को मार गिराया है। गुरुवार को हुई मुठभेड़ में 15 नक्सली ढेर किए गए थे, जिनमें कुख्यात और करोड़ों के इनामी नक्सली अनल, अनमोल और अमित मुंडा शामिल थे। इन पर झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी इनाम घोषित था। अब तक मारे गए 16 नक्सलियों में से 13 की पहचान हो चुकी है, जबकि बाकी की शिनाख्त की जा रही है। मारे गए नक्सलियों में महिलाओं की संख्या भी बताई जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि संगठन की कमर अब पूरी तरह टूटने लगी है।
सरंडा जंगल लंबे समय से झारखंड में नक्सलियों का सबसे मजबूत और सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। दुर्गम पहाड़ियां और घना जंगल नक्सलियों को छिपने और हमला करने का बड़ा मौका देते थे। लेकिन मौजूदा अभियान ने उनकी इस आखिरी मजबूत पनाहगाह को भी कमजोर कर दिया है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और हर संदिग्ध स्थान की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार, गोला बारूद और नक्सली सामग्री बरामद की गई है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय लाया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस ऑपरेशन के बाद झारखंड में सक्रिय नक्सलियों की संख्या घटकर करीब 60 से 65 के आसपास रह गई है।
झारखंड पुलिस के आईजी ऑपरेशंस माइकल राज एस और सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार ने इस अभियान को बड़ी सफलता करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जीत बताया है। उन्होंने बचे हुए नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है और चेतावनी दी है कि जो नहीं मानेंगे उनके खिलाफ ऐसी ही सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। गृह मंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरंडा में हुई यह कार्रवाई उसी लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत और निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिसने नक्सलियों के मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है।

