रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री रामदास अथावले Jharkhand पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का आमंत्रण दिया। रामदास ने कहा कि अगर हेमंत सोरेन चाहते हैं कि झारखंड का विकास हो तो उन्हें एनडीए का हिस्सा बनना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करने से झारखंड को केंद्र से अधिक धनराशि मिलेगी और राज्य की प्रगति तेजी से होगी। उन्होंने साफ कहा कि विकास के लिए ये कदम लाभकारी साबित होगा। केंद्र सरकार पूरी तरह से झारखंड सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार है यदि मुख्यमंत्री एनडीए के साथ जुड़ते हैं।
रामदास अथावले ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से यह भी आग्रह किया कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी का साथ छोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हो जाएं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड को हर संभव मदद देने के लिए तत्पर है, लेकिन इसके लिए राज्य नेतृत्व को सही दिशा में कदम बढ़ाना होगा। यह राजनीतिक संदेश सीधे तौर पर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने वाला माना जा रहा है। अथावले की इस बात ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है और विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक दबाव और गठबंधन तोड़ने की कोशिश बताया है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने रामदास अथावले के बयान पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने अथावले को राजनीतिक सर्कस का जोकर कहा और सवाल उठाया कि क्या एक संवैधानिक केंद्रीय मंत्री इस तरह धमकी दे सकता है। वहीं, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि अथावले दरअसल ‘विभाजन और शासन’ की नीति अपना रहे हैं। झामुमो नेताओं का कहना है कि राज्य की जनता ने स्पष्ट रूप से अपनी पसंद जाहिर की है और ऐसे बयान केवल राजनीतिक माहौल को खराब करने वाले हैं। राजनीतिक विरोधी दलों ने इस प्रस्ताव को राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामदास अथावले ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि झारखंड के धनबाद जिले के मैथन डैम में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक डॉ. अंबेडकर के सम्मान में होगी। मंत्री रांची में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के लिए मौजूद थे, जहां उन्होंने यह घोषणा की। यह परियोजना झारखंड में सामाजिक समरसता और दलित समुदाय के उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस कार्यक्रम से राज्य में अंबेडकर के विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

