Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां कर्ज के भारी दबाव ने एक मां और उसकी नाबालिग बेटी की जिंदगी छीन ली। मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के श्रीरामपुर गांव में 35 वर्षीय पुतुल देवी और उनकी 15 वर्षीय बेटी स्नेहा कुमारी ने आत्महत्या कर ली। जैसे ही इस घटना की जानकारी गांव और आसपास के इलाके में फैली, हर कोई सन्न रह गया। कर्ज की मार और मानसिक तनाव ने किस तरह एक पूरे परिवार को तोड़ दिया, यह घटना उसी की भयावह तस्वीर पेश करती है।
जानकारी के अनुसार पुतुल देवी ने किसी महिला समूह से करीब पांच लाख रुपये का लोन लिया था। इस कर्ज के बारे में उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य को नहीं बताया था। समय के साथ लोन की किस्तों का दबाव बढ़ता गया। लगातार फोन कॉल और भुगतान की याद दिलाने वाली बातों से पुतुल देवी मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं। परिजनों के अनुसार वह पिछले कुछ समय से बेहद परेशान रहती थीं और अक्सर अकेले में रोती थीं। जब परिवार के लोग उनसे परेशानी का कारण पूछते थे, तो वह कुछ भी बताने से बचती थीं। शायद उन्हें डर था या समाज और परिवार के सामने अपनी मजबूरी जाहिर करने का साहस नहीं जुटा पा रही थीं।
घटना का खुलासा उस समय हुआ, जब सुबह काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला। परिजनों को शक हुआ और उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की। जैसे ही दरवाजा खुला, अंदर का दृश्य देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां और बेटी दोनों घर के अंदर फांसी के फंदे से लटकी हुई थीं। शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। आनन-फानन में दोनों को नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मां और बेटी की सांसें थम चुकी थीं। इस दृश्य ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया और हर आंख नम हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। परिजनों से पूछताछ की जा रही है और कर्ज से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है। इस हृदयविदारक घटना के बाद मृतकों के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे श्रीरामपुर गांव में शोक का माहौल है। लोग स्तब्ध हैं कि आखिर आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव इंसान को किस हद तक मजबूर कर सकता है। यह घटना समाज के लिए भी एक गंभीर सवाल छोड़ गई है कि कर्ज के बोझ से जूझ रहे लोगों तक समय रहते मदद क्यों नहीं पहुंच पाती।

