Jharkhand News: झारखंड के वेस्ट सिंहभूम जिले के नोआमुंडी ब्लॉक के जेटया गांव से सामने आया है एक भयानक मामला, जहां जंगली हाथियों ने अपना कहर बरपाते हुए सात लोगों की जान ले ली। इनमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी शामिल हैं, जिनकी मौत उनके बेटे के सामने हुई। इस भीषण घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। पिछले सात दिनों में कुल 17 लोगों की जान हाथियों के हमले में जा चुकी है। स्थानीय लोगों में खौफ के माहौल के बीच वन विभाग ने हाथियों को पकड़ने और नियंत्रित करने के लिए एक विशेष टीम गठित की है।
बीते कुछ दिनों में हाथियों के खूनी हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दो दिन पहले ही इसी क्षेत्र के एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हुई थी, जिसके बाद हाल ही में एक दिन में सात लोग हाथियों के तांडव की शिकार बने। खासतौर पर बावड़िया गांव में सनतन मेराल, उनकी पत्नी जोलोकों कुई, उनकी नाबालिग बेटी दमयंती मेराल और नाबालिग बेटे मुंगदू मेराल समेत पूरे परिवार को हाथियों ने मौत के घाट उतार दिया। यह परिवार ठंड से बचने के लिए पुआल की झोपड़ी में सो रहा था, तभी अचानक हाथियों का झुंड वहां पहुंचा और उन्हें कुचल डाला। इस घटना का गवाह बने सनतन के बेटे जयपाल, जो पास ही दूसरी झोपड़ी में सो रहा था, वह किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा।
बावड़िया गांव में इस भीषण घटना के बाद हाथियों का आतंक रुकने का नाम नहीं ले रहा। वह झुंड गम्हरिया इलाके तक पहुंचा, जहां उसने चिपरी हेम्ब्रम नामक महिला को कुचल डाला और चार अन्य लोगों को घायल कर दिया। वन विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया है जो हाथियों को पकड़ कर उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ने का कार्य करेगी। इस काम के लिए ओडिशा से विशेषज्ञों की मदद भी मांगी गई है। इन प्रशिक्षित टीमों का मकसद हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाए नियंत्रित करना है ताकि क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
झारखंड में यह पहली बार नहीं है जब हाथियों ने इतनी बड़ी तबाही मचाई हो। फरवरी 2023 में भी रांची के इटकी थाना क्षेत्र में हाथियों के हमले में चार लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद प्रशासन ने इटकी थाना क्षेत्र में धारा 144 लागू कर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। लेकिन इन हालिया घटनाओं ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं कि वन्यजीवों और मानव बस्तियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। स्थानीय लोग और वन विभाग दोनों चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी हाथियों के हमले रोके जाएं ताकि लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा हो सके।

