Jharkhand: धार्मिक नगरी बैद्यनाथधाम में जिला खाद्य सुरक्षा विभाग ने बिना पंजीकरण और खुले में चल रही मीट और पोल्ट्री दुकानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 और फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन 2011 के निर्देशों का पालन न करने वाली दुकानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला खाद्य अधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने मीट और पोल्ट्री दुकानदारों को नियमों का पालन करने संबंधी विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
मीट या पोल्ट्री की दुकान संचालित करने के लिए फूड लाइसेंस या पंजीकरण लेने से पहले स्थानीय निकाय और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य होगा। दुकानों में खुले में मीट काटना या लटकाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह कदम दुकानदारों को कानून के प्रति संवेदनशील बनाने और ग्राहकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
दुकान की संरचना और दूरी संबंधी नियम
दुकान का प्रवेश द्वार स्वयं बंद होने वाला और काले कांच का होना चाहिए। दुकान की ऊँचाई कम से कम तीन मीटर होनी चाहिए जबकि एयर-कंडीशन वाली दुकानों में यह 2.5 मीटर होनी चाहिए। दीवारें पांच फीट तक जलरोधक कंक्रीट की बनी हों और फर्श पक्के फिसलन रहित और ढलान वाले हों। धार्मिक स्थलों से मीट और पोल्ट्री की दुकानों की दूरी कम से कम 50 मीटर होनी चाहिए। यदि दुकान धार्मिक स्थल के मुख्य गेट के सामने है तो यह दूरी 100 मीटर होनी चाहिए। इसके अलावा दुकान के आसपास सब्जी या मछली की दुकानें नहीं होनी चाहिए।
स्वच्छता भंडारण और साइनबोर्ड नियम
सभी मीट काटने वाले उपकरण स्टेनलेस स्टील के होने चाहिए। दुकान में पेयजल उचित ड्रेनेज कवर की हुई काउंटर टेबल और जानवरों के अपशिष्ट निपटान की व्यवस्था होनी चाहिए। 48 घंटे से अधिक मीट संग्रहण के लिए फ्रीजिंग या डिस्प्ले कैबिनेट होना आवश्यक है जिसकी तापमान सीमा 4-8 डिग्री सेल्सियस हो। दुकान में अच्छी वेंटिलेशन और क्रॉस वेंटिलेशन की सुविधा होनी चाहिए। प्रत्येक दुकान में स्पष्ट साइनबोर्ड होना चाहिए जिसमें मीट झटका या हलाल बताया गया हो। नियमों का पालन न करने पर दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला खाद्य अधिकारी ने सभी दुकानदारों से निर्देश दिया है कि वे केवल लाइसेंस और पंजीकरण प्राप्त करने के बाद ही व्यवसाय संचालित करें। नियमों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दुकानें सील की जा सकती हैं। यह पहल न केवल ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि मीट और पोल्ट्री उद्योग में पारदर्शिता और जिम्मेदारी भी बढ़ाएगी।

