जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान जवान अजय लकड़ा वीरगति को प्राप्त हो गए। धुर्वा स्थित लाबेद गांव के रहने वाले अजय की मौत खाई में गिरने से हुई, जो उनके परिवार के लिए एक बड़ा सदमा साबित हुआ है।
अजय के पिता स्वर्गीय लोहरा उरांव कई साल पहले गुजर चुके थे। पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पोकलो देवी ने अकेले संभाली। कठिन हालातों में उन्होंने मेहनत और मजदूरी करके बच्चों का पालन-पोषण किया। पोकलो देवी ने हड़िया बेचकर अपने छह बच्चों को बड़ा किया और उनमें से तीन को सरकारी नौकरी दिलवाई।
अजय लकड़ा का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। उन्होंने हमेशा खुद को शारीरिक रूप से मजबूत बनाए रखा और दौड़ जैसी मेहनती गतिविधियों में भाग लिया। इसी लगन के कारण सात साल पहले अजय सेना में भर्ती हुए। उनका छोटा भाई अरूण लकड़ा सीआइएसएफ में तैनात है, जबकि उनकी छोटी बहन अंजू लकड़ा झारखंड पुलिस में कार्यरत हैं।
सेना के अधिकारियों ने मां को फोन पर बेटे की शहादत की जानकारी दी। यह खबर सुनते ही पूरा गांव शोक में डूब गया। अजय का शव जल्द ही रांची पहुंचने की संभावना है। परिवार और गांव के लोग उनकी शहादत को सम्मान और गर्व के साथ याद कर रहे हैं।
दिसंबर 2025 में अजय 15 दिन की छुट्टी पर रांची आए थे। छुट्टी पूरी करके वह फिर से जम्मू-कश्मीर लौट गए थे। उनका विवाह नहीं हुआ था क्योंकि वे चाहते थे कि पहले परिवार की जिम्मेदारी पूरी करें।
अजय लकड़ा की शहादत न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। उनकी मां की संघर्षपूर्ण जिंदगी और अजय की बहादुरी देश के लिए एक मिसाल है। आज पूरा परिवार और समाज उनके बलिदान को सलाम कर रहा है।

